Friday, August 5, 2011

देहव्यापार और लडकियों का नन्हा जीवन

भ्रूण हत्या,शिशु हत्या और मानव तस्करी जैसे अपराधों के कारण भारत की छवि  दुनिया में खराब 
  
होती जा रही है। एक सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए चौथा खतरनाक देश बताया गया है। सर्वे थॉमसन रॉयटर्स ट्रस्ट लॉ वूमेन की ओर से कराया गया है। सर्वे के दौरान 213 विशेषज्ञों की राय ली गई। 2009 में भारत के गृह सचिव मधुकर गुप्ता नेकहा था कि 100 मिलियन लोग मानव तस्करी में शामिल हैं। 2009 में सीबीआई ने अनुमान लगाया था कि 90 फीसदी मानव तस्करी देश में ही होती है। सीबीआई के मुताबिक देश में तीन मिलियन सेक्स वर्कर हैं। इनमें से 40 फीसदी बच्चे हैं।
2009 के मुकाबले 2010 में ज्यादा हुआ अपराध
दिल्ली पुलिस द्वारा दिए गए आपराधिक आंकड़ों के मुताबिक जहां वर्ष 2009 में फिरौती के लिए अपहरण के 27 मामलों के मुकाबले 2010 में कुल 16 ही मामले दर्ज किए गए। यही हाल दंगे के मामलों में भी रहा 2009 के 58 के मुकाबले 2010 में कुल 50 ही मामले दर्ज किए गए।
हाल ही में जारी चाइल्ड राइट्स एंड यू ( क्राई ) की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली से रोजाना 18 से 20 बच्चे गुम हो जाते हैं , जिनमें से ज्यादातर की उम्र 12 से 18 साल के बीच होती है। इन गुमहोने वाले बच्चों में से
 
6.76 प्रतिशत की उम्र 0-6 साल,
6.76 प्रतिशत की 7-12 साल और
72.8 प्रतिशत की उम्र 12-18 साल के बीच होती है। क्राई की डायरेक्टर योगिता वर्मा ने कहा "बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए काफी जरूरी है कि सभी केसों के अपडेटेड रेकॉडर्स हों।"
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के एक आंकलन के हवाले से 2002 में दुनियाभर से करीब 12 लाख बच्चों की तस्करी हुई। वहीं युनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट आफ स्टेट के आकड़ों (2004) का दावा है कि दुनिया में तस्करी के शिकार कुल लोगों में से आधे बच्चे हैं। अकेले बच्चों की तस्करी से हर साल 10 अरब डालर के मुनाफे का अनुमान है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बाल मजदूरी से जुड़े आकड़ों (2000) का अनुमान है कि सेक्स इंडस्ट्री में 18 लाख बच्चों का शोषण हो रहा है। इनमें भी खासतौर से लड़कियों की तस्करी विभिन्न यौन गतिविधियों के लिए हो रही है। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का यह भी अनुमान है कि घरेलू मजदूरी में भी लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है।

प्राकृतिक आपदाओं की वजह में बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोहों की
सक्रियता भी बढ़ रही है। इस दौरान यह गिरोह अपने परिवार वालों से बिछुड़े और गरीब परिवार के बच्चों को निशाना बनाते 
हैं। इसके अलावा गरीबी के चलते कई मां-बाप अपनी बेटी को आर्थिक संकट से उभरने का उपाय मानते हैं और पैसों की खातिर उसकी शादी किसी भी आदमी के साथ कर देते हैं। इन दिनों अधेड़ या बूढ़े आदमियों के लिए नाबालिग लड़कियों की मांग बढ़ती जा रही है। उन बच्चों के बीच तस्करी की आशंका बढ़ जाती है जिनके जन्म का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। युनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रन्स फंड, बर्थ रजिस्ट्रेशन के मुताबिक 2000 में 41 प्रतिशत बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। बच्चों की कानूनी पहचान न होने से उनकी तस्करी करने में आसानी हो जाती है। ऐसे में लापता बच्चों का पता -ठिकाना ढ़ूढ़ना मुश्किल हो जाता है।

तस्करी और लापता बच्चों के बीच गहरे रिश्ते का खुलासा एनएचआरसी की रिसर्च
रिपोर्ट (2004) भी करती है जिसमें कहा गया है कि भारत में एक साल 30 हजार से ज्यादा बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज होते हैं, इनमें से एक तिहाई का पता नहीं चलता है।

तस्करी के तार अंतर्राष्ट्रीय और संगठित अपराध की बहुत
बड़ी दुनिया से जुड़े हैं। यह इतनी भयानक, विकराल और अदृश्य दुनिया है कि इसे ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेना आसान नहीं है। यह शारारिक और यौन शोषण के घने जालों से जकड़ी एक ऐसी दुनिया है जिसको लेकर सटीक नतीजे तक पहुंच पाना भी मुश्किल है।
तस्करी को पालेर्मो प्रोटोकाल (
2000) के अनुच्छेद 3 और 5 में दी गई परिभाषा के मुताबिक : ‘‘व्यक्तियों की तस्करी का अर्थ धमकी या जबरन या अपहरण जालसाजी, धोखे, सत्ता के गलत इस्तेमाल, असहायता की स्थिति, किसी दूसरे व्यक्ति पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति की सहमति पाने के लिए पैसे, लाभ के लेन-देन के लिए व्यक्तियों की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, शरण या प्राप्ति है।’’

दुनिया भर में बच्चों की तस्करी सबसे फायदेमंद और तेजी से उभरता काला धंधा
है। क्योंकि एक
  
तो इसमें न के बराबर लागत है और फिर नशा या हथियारों की तस्करी के मुकाबले खतरा भी कम है। इस धंधे में बच्चे कीमती सामानों में बदलते हैं और मांग-पूर्ति के सिद्धांत के हिसाब से देश-विदेश के बाजारों में बिकते हैं। तस्करी में ऐसा जरूरी नहीं है कि बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बाहर ही ले जाया जाए। एक बड़ी संख्या में बच्चों की तस्करी गांवों से शहरों में भी होती है। इसके अलावा पर्यटन से जुड़ी मांग और मौसमी पलायन के चलते भी तस्करी को बढ़ावा मिलता है। देश के भीतर या बाहर, दोनों ही प्रकार से बच्चों की तस्करी भयावह अपराध है। इसलिए बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सार्वभौमिक न्याय का अधिकार देने वाले कानून की सख्त जरूरत है।

फौजदारी कानूनों को न सिर्फ मजबूत बनाने होंगे बल्कि उन्हें कारगर ढ़ंग से
इस्तेमाल भी करने होंगे। बच्चों की तस्करी से जुड़ी सभी गतिविधियों, लोगों और एंजेसियों पर फौजदारी कानून के तहत कार्रवाई हो। इसके अलावा शोषण से संरक्षण देने वाले ऐसे कानून और नीतियां हो जो बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सीधे असर सकें। इनमें पलायन, बाल मजदूरी, बाल दुरुपयोग और पारिवारिक हिंसा से जुड़े कानून आते हैं। यहां एक और बात स्पष्ट है कि बच्चों की तस्करी रोकने के कानूनी उपाय तब तक बेमतलब रहेंगे जब तक कानूनों को इस्तेमाल करने और उनकी निगरीनी करने की उचित व्यवस्था नहीं रहेगी। साथ ही साथ तस्करी के शिकार बच्चों को तेजी से पहचानने के लिए कारगर तरीके बनाने और उन्हें अपनाने की भी जरुरत है।
 
  

भारत में देह-व्यापार की रोकथाम के लिए ‘भारतीय दण्डविधान, 1860’ से लेकर ‘वेश्यावत्ति उन्मूलन विधेयक, 1956’ बनाये गए। इस स्थिति की जड़े तो समाज की भीतरी परतों में छिपी हैं इसकी रोकथाम तो समाज के गतिरोधों को हटाने से होगी।  इस व्यापार से जुड़ी औरतें दो जून की रोटी के लिए लड़ रही हैं। इसलिए विकास नीति में लोगों के जीवन स्तर को उठाने की बजाय उन्हें जीने के मौके देने होंगे।   देहव्यापार के गणित को हल करने के लिए उन्हें अपनी जगहों पर ही काम देने का फार्मूला ईजाद करना होगा।

Wednesday, July 27, 2011

nya manch

छोटी सी दुनिया



बढ़ते वेब की दुनिया में एक और क्रांति







आप सभी लोगो से अनुरोध है की आप सभी इसका हिस्सा बने

Tuesday, July 12, 2011

मंत्री मंडल

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा की
'चुनाव के पहले का ये आख़िरी फेरबदल'
छोटे बाबा को कर दिया न नाराज
चाहे वो कुछ न कहे लेकिन
उनके मन में तो आपको हटाने की है
अपने मंत्रालय में बड़े फेरबदल किए हैं
बाबा को तो शामिल किया ही नहीं
क्या बाबा एस तरह ही दर दर भटकते फिरेंगे
आपके कुछ मंत्रियों से खबर लगी है
की इस्तीफा दे रहे है
क्या मजबूरी है की आप अभी भी साफ सुथरे नेता नहीं चुन सके
क्या ये पुराने मंत्रियो की तरह 2 जी का कमाल नहीं कर सकेंगे
क्या नही आता इनको कोई घोटाला करना?
ममता ने अपने 2 पत्ते अभी खोले नहीं है
देखना है की आपके ये नये चहरे क्या कमाल करते है?
या ये भी हो जायेंगे पुराने मंत्रियो की तरह ?

Monday, June 6, 2011

बाबा और सरकार

मै बाबा का व्यक्तिगत रूप से विरोधी हु लेकिन सरकार ने  बाबा के साथ जो किया ! वो लोकतंत्र पर मामला है
इस हमले में दिल्ली पुलिस केंद्र के इशारे पर काम कर रही है
फिर एक और नया चेहरा दिल्ली पुलिस का  सामने आया है
राम लीला मैदान की 4 जून की रात की फुटेज रिकोर्डिंग पुलिस ने मिडिया से मांगी है
बाबा के द्वारा लगाये गए CCTV  केमरे की रिकोर्डिंग और साईं चेनल के दवारा लगाये गए!
ये सभी सामान के साथ साथ कुछ लोगो को भी कल रात को जबरन उठा कर ले गई
अब केसिट्स में फेर बदल कर देगे ऐसा आरोप लगा रहे है बाबा
देखना है की आगे न्यायपालिका मे किस फुटेज और  रिकोर्डिंग पेश  किया जाता है
और किस पर विश्वास करेगी ?

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है लेकिन उन्होंने यह कहते हुए कार्रवाई का बचाव भी किया कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था बाबा ने हरिद्वार मे प्रधानमंत्री के बयान पर कहा की इसके ली उन्हें  व्यक्तिगत रूप से माफ़ कर सकता हु लेकिन मेरे भक्त गण माफ़ नहीं करेगे बाबा का अगला पलट वार क्या होगा? सत्ता मे हलच मची हुई है सरकार का अगला कदम क्या होगा? मिडिया को  नया मसाला  क्या मिलेगा ?
8 जून को  अन्ना  जन्तर मन्तर पर सत्याग्रह का रहे है क्या ये होगा मिडिया का नया मसाला या फिर कुछ और
मिडिया इस मामले को बनाने के बजये बिगड़ने मे लगी हुई है
पुरे दिन एक ही खबर के पीछे पड़ी रहती है चाहे खबर मे नया कुछ भी न हुआ हो लेकिन मिडिया उसमे नामक मिर्ची लगा कर ब्रेकिंग न्यूज कह देती  है और चलती रहती है

बाबा और उमा भारती

 समाचारों के मुताबिक बाबा और उमा भारती  की प्रेस कन्फ्रेंश हरिद्वार में हो रही है जिसमे बाबा ने कहा की देश के सबसे बड़े न्यायलय को धन्यवाद देते है की उन्होंने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेज कर रामलीला मैदान में हुई घटना पर जवाब 2  सप्ताह में मांग है! दिल्ली पुलिस झूठ बोल रही है केंद्र सरकार भी झूठी बयान बजी कर रही है गाँधीवादी सिध्दान्तो की हत्या के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है! पंडाल में पुलिस ने आशु गेस  के गोले दागे! बाबा ने कहा की बंद पंडाल में आशु गेस  के गोले नहीं दागे जाते ! जिससे पंडाल में आग लगी! पंडाल में 3  बार आग लगाने की कोशिश की गई! बाबा के सुरक्षा कर्मियों ने आग को बुझाया तो पुलिस ने उन पर भी डाँडो से वार किया! जिससे कई लोग घायल हुए! बाबा  सयन्त्र्ण का आरोप नहीं लगा रहे  है ये तथ्य है जो मिडिया ने दिखाया है!
घायलों को अस्पताल में ले जाया गया और वहा से एक दिन के मामूली उपचार  के बाद  छुट्टी कर दी गई है! घायलों का आरोप है की पुलिस जल्द से जल्द अस्पताल से भगाने में लगी हुई है इसी भगदड़ में यदि कोई घायल होता है और घायल व्यक्ति 10  दिन से ज्यादा अस्पताल में रहता है! ऐसे मामलो में पुलिस पर 307  का केस बनता है!  जिसमे पुलिस पर कार्यवाही बनती है जिससे बचने के लिए पुलिस जल्दी से सभी को भगाने में लगी हुई है !
जब सरकार और अन्य राजनीतिक पार्टिया  जन सभा  भीड़ जुटाने  के लिए पेसे खर्च कर  सकती  है तब कोई हिसाब नहीं देखा जाता? बाबा के साथ फ्री  इतनी भीड़ को देखा कर सरकार क्यों डर रही है? 

जब आतंकी घटना होने से पूर्व आतंकी मेल और धमकी भरे ख़त भेजते है तो सरकार रोक नहीं पाती फिर यह तो कोई दमकी भाई नहीं मिली थी !  पुलिस का कहना है की पुलिस बाबा को गिरफ्तार करने नहीं आई थी बल्कि  बाबा व् उनके एक  नजदीकी  सहयोगी  को  खतरे  की  सुचना देने और राम लीला मैदान को खाली करने के लिए गई थी! मैदान खाली का कारण भीड़ की क्षमता अधिक होने है !


बाबा की आवाज आम जनता की आवाज है और सरकार ने जिस तरह से मुद्दे को हल करने कोशिश की है वो मानवता के सिध्दान्तो से तो परे है लोक पल कमेटी के सदस्य अन्ना हजारे ने अपनी लोकपाल की सभा भी अस्थिगत कर दी है अन्ना ने मामले को देखते हुए सरकार के सामने एक शर्त रखी है की मीटिंग की रिकोडिंग की जाये जिससे जनता को पता चल सके की बैठक में क्या बात चित हुई है !
अन्ना हजारे 8 जून को जन्तर  मन्तर पर एक दिन का सत्यग्रह करेगे ! भाजपा पार्टी कल शाम से राजघाट पर ही धरने दे दिया है भाजपा के प्रमुख नेता दोपहर में महामहिम राष्ट्रपति से मिलेगे और  इस मामले को गंभीरता से लेने की आपिल करेगे!

Sunday, June 5, 2011

रामलीला मैदान बनाम सरकार

आज पुरे दिन बाबा रामदेव की ही खबर चलती रही है ! टीवी चेनल वाले बाबा को पुरे दिन घेरे रहे ! खबर ही कुछ टीवी पर  चेनल  नए नए  बैनर  बना  बना कर खबर देते रहे      सभी ताजा तस्वीरों   को देखने  की कोशिश  में लगे  रहे! बाबा को मिडिया  का पूरा  सहयोग  मिला ,  बाबा का अनशन बीच  में ही सरकार ने रुकवा  दिया, रामलीला मैदान में रात को करीब 1 :30 बजे पुरे दलबल के साथ  बाबा के समर्थ  को खदेड़ा  गया, बाबा भी महिला  के रूप  में वहा  से भाग  गए  बाबाने बताया  की जब  पुलिस  ने आसू  गोले  छोड़े  तब  जनता  सो  रही थी  जिससे  ज्यादातर  लोग  घायल  हुए
यूपी. ए सरकार में बाबा के अनशन का डर देखते ही बनता है जब बाबा को लेने  लिए मंत्री हवाई अड्डे जा पहुचते है बाबा लगातार सरकार से बातचित करने के लिए राजी थे तो फिर यू. पी.ए सरकार ने आन्दोलन को इस तरह क्यों दबाया गया!  बाबा चाहे जो भी करते है या करते रहे है इस आन्दोलन से उसका का कोई लेना देना नहीं है ये लड़ाई भ्रष्टाचार को  लेकर है काले धन को लेकर है सरकार इस तरह के कारनामे करके यू. पी.ए सरकारक्या दिखाना चाहती है ? कल होने वाली लोकपाल बिल की मीटिंग का क्या होगा ? क्या लोकतंत्र में अनशन अधिकार भी हाथ से जाने का खतरा बन चूका है यह के हालत देखते हुए तो आगे क्या करेगे बाबा ? और यू. पीए सरकार का अगला कदम क्या होगा ?  क्या प्रधान मंत्री जी इस पर कुछ कहेगे ?
लगभग डेढ़ बजे दिल्ली पुलिस हरकत में आई और 5000 जवानों ने रामदेव और समर्थकों को पंडाल को घेर लिया पुलिस का कहना है की रामलीला मैदान योग के लिए लिया गया था और यहा 5 हजार लोगो तक के लिए अनुमति थी लेकिन बाबा ने 5 हजार लोगो से ज्यादा की भीड़ इक्कठी कर रखी थी और ये भीड़ योग के लिए नहीं, आन्दोलन करने के लिए जुटाई गई थी पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता के अनुसार पांच हज़ार लोगों के जमा होने की इजाज़त थी पर 50-60 हज़ार लोग जमा हुए और योग शिविर की इजाज़त रद्द कर दी गई! पुलिस ने अनेक वृद्ध लोगों और महिलाओं के भी जबरन पंडाल से निकाल दिया लेकिन बलप्रयोग से पुलिस इंकार कर  रही  है
स्वामी रामदेव कहा  की "हमें सूचनाएं मिल चुकी थीं कि सरकार का आदेश है कि रामदेव को गिरफ़्तार करके या तो एनकांउटर किया जाए, या गायब कर दिया जाए. .मेरे जीवन पर किसी भी ख़तरे की ज़िम्मेदार सोनिया गाँधी और केंद्र सरकार होगी. चार जून की रात इतिहास की सबसे काली रात है... निहत्थे लोगों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार हुआ है"
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह"इस बात की जाँच होनी चाहिए कि उनकी संपत्ति का स्रोत क्या है, उनसे संबंधित जिन संस्थानों को करमुक्त किया गया है, क्या वो नियमानुसार काम कर रहे हैं और उनके एक योग गुरु और कुछ साथियों का अतापता नहीं है, वे अब कहा हैं?"










बाबा रामदेव को 15 दिन के लिए दिल्ली से बहार रहने का हुकुम सुना दिया गया है यानि की तड़ीपार रहेने को कहा गया है सरकार इसमे कुछ बोलने के लिए तेयार नहीं है बाबा रामदेव ने शाम होते होते उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से बात करने का मन बना लिया है जिससे वो आपना अनशन उत्तर प्रदेश के नोयडा में करने की अनुमति मागने की बात कह रहे है साथ ही साथ बाबा ने कह दिया की "दिल्ली किसी के बाप की नहीं"! अन्ना हजारे ने इस घटना पर निंदनीय करार दिया है! यह स्थिति जलियावाला कांड से जोड़ कर देखना गलत है मिडिया को आपने आप पर सयम रखना होगा कही मिडिया अर्थ का अनर्थ ना कर दे फटा फट खबर देने के चक्कर में मिडिया कर्मी भूल जाते है की किस बात का क्या असर होने वाला है! जलियाँवाला बाग कांड कहा कर उन शहीदों का अपमान सा किया जारहा है
केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने  कहा, "जो योगी जनता को योगासन सिखाने के लिए जाना जाता है वह लोगों को राजनीतिक आसन न सिखाए."

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने  कहा,  "भारतीय जनता पार्टी की ओर से महात्मा गांधी की समाधी राजघाट पर रविवार भारतीय समयानुसार शाम सात बजे से 24 घंटे का सत्याग्रह होगा. ये जलियाँवाला बाग जैसी घटना. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.ये अलोकतांत्रित और फ़ासीवादी प्रवृत्ति के ख़िलाफ़ सत्याग्रह है और इसमें मेरे साथ लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और राजनाथ राजघाट पर बैठेंगे" इस पर बाबा ने साफ कर दिया की वे किसी पार्टी के लिए ये लड़ाई नहीं लड़ रहे है ये लड़ाई देश का कला धन वापिस लेन की लड़ाई है और इसे आगे भी जारी  रखेगे!
आगे क्या होगा? कोन इस मसले को सुलझाएगा? ये प्रश्न बार बार मिडिया उठा रही है क्या होगा आगे? देश में एक नै क्रांति पंप रही है क्या इसको सरकार आगे बदने देगी या फिर बाबा ही समझोता कर लेगे?